शास्त्रीय नृत्य
- शास्त्रीय नृत्य के बारे में जानकारी भरत मुनि के नाट्य शास्त्र में मिलती है। इसे पंचम वेद माना जाता है।
- शास्त्रीय नृत्यों की कुल संख्या 8 है।
- संस्कृति मंत्रालय के अनुसार – 9 (9वां: छऊ)
- संगीत नाटक अकादमी – 8 (स्थापना: 28 जनवरी 1953, दिल्ली)
#छऊ नृत्य
- छऊ को अर्द्धशास्त्रीय नृत्य भी कहा जाता है।
- इसे यूनेस्को की अमूर्त सूची (2010) में शामिल किया गया।
प्रकार
- मयूरभंज छऊ – ओडिशा
- सरायकेला छऊ – झारखण्ड
- पुरुलिया छऊ – पश्चिम बंगाल
#शास्त्रीय नृत्य और संबंधित राज्य
| नृत्य | राज्य |
|---|---|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु |
| ओडिसी | ओडिशा |
| मणिपुरी | मणिपुर |
| कुचिपुड़ी | आन्ध्र प्रदेश |
| कथक | उत्तर प्रदेश |
| कथकली | केरल |
| मोहिनीअट्टम | केरल |
| सत्रिया | असम |
| छऊ | पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, ओडिशा |
प्रमुख नृत्यों का विवरण
#1. भरतनाट्यम (तमिलनाडु)
- पुराना नाम: सादिर
- अन्य नाम: दासी अट्टम, अग्नि नृत्य
- स्रोत: शिल्पादिकारम (इलंगो अडिगल), अभिनय दर्पण (नंदिकेश्वर)
- मंदिरों से संबंधित; शैव धर्म पर आधारित
संरचना
- आलारिपु (आरंभ)
- जातीस्वरम्
- शब्दम्
- वर्णम्
- पदम्
- तिल्लाना (अंत)
विशेषताएँ
- कटका मुख हस्त मुद्रा : इसमे 3 अंगुलियों को जोड़कर
ॐका प्रतीक निर्मित किया जाता है | - कर्नाटक संगीत का प्रयोग
- शिक्षक: नट्टूवार
- एकल कलाकार द्वारा विभिन्न भूमिकाओं को दर्शाया जाता है जिसे
एकाहार्य / लस्यांगकहा जाता है - 1910 में ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध लगाया
- शैली - कलाक्षेत्र , वजूवुर , कलामंडलं
- वाधयंत्र - मृदंगम , वीणा , बाँसुरी आदि
- भरतनाट्यम के चित्र
चिदंबरम मंदिर (तमिलनाडु)केगोपुरमपर स्थित है |
भरतनाट्यम
#2. ओडिसी (ओडिशा)
- जनक: गुरु पंकज चरणदास
- भगवान कृष्ण और जगन्नाथ से संबंधित
- यह नृत्य शैली भगवान जगन्नाथ की पूजा यात्रा से संबंधित है |
- त्रिभंग मुद्रा; जल तत्व का प्रतीक
- जयंतिका ने 5 भागीय मुद्रा विकसित की
- इसे ओरीली भी कहा जाता है |
संरचना
- मंगलाचरण (आरंभ) : पृथ्वी माता को पुष्प अर्पित
- मोक्ष (अंत) : थारीझम नृत्य से
विशेषताएँ
- पखावज अक्षरों का प्रयोग , इस नृत्य को समाप्त करने के लिए किया जाता है
- नृत्य उदाहरण - उदयगिरी - खंड़गिरी गुफा
- मुख्यत महारियों ( महारी ) कम्यूनिटी द्वारा किया जाता है
- नृत्यांगनाए शरीर से जटिल ज्यामितीय आकृतियाँ बनाती है , जिसे सचल मूर्ति कहा जाता है
- वाद्ययंत्र: मंजीरा, पखावज, ढोल, सितार
ओडिसी
#3. मणिपुरी (मणिपुर)
वैष्णवसम्प्रदाय से संबंधित- भगवान कृष्ण के बाल्यकाल की कहानियाँ दर्शायी जाती है |
प्रमुख शैलियाँ
- लाई हरोबा
- संकीर्तन
- रासलीला
विशेषताएँ
- मणिपुरी नृत्य रासलीला को पहली बार 1779 मे निंगथो चिंग-थाँग खोंबा ने शुरू किया था |
- जवाहर लाल नेहरू मणिपुरी नृत्य अकादमी - मणिपुर
- पेना वाद्ययंत्र
- इसमें नटगायन का प्रयोग किया जाता है।
- नृत्य, वाद्ययंत्र बजाना, गाना गाना एक ही व्यक्ति द्वारा किया जाता है इसे "पंग चोलेम" कहा जाता है, इसमें ड्रम का प्रयोग किया जाता है।
- (जागोई + चोलेम) मणिपुरी के 2 प्रमुख भाग है
- इसमें 64 तालों का प्रयोग होता है
- नागबंध मुद्रा – जिसमें शरीर 8 के आकार में वक्रों के माध्यम से जुड़ा होता है
- इसमें कलाकार बेलनाकार स्कर्ट पहनते है जिसे ‘योटिओई’ कहा जाता है।
- कलाकार दर्शकों से आँख नहीं मिलाता
मणिपुरी
#4. कुचिपुड़ी (आन्ध्र प्रदेश)
- संस्थापक: सिद्धेंद्र योगी
- नर्तक: भागवतालु
विशेषताएँ
- तरंगम (पीतल की थाली पर नृत्य)
- मंडूक शब्दम
- जल चित्र नृत्यम
- पुरुष पोशाक: बगलबंधी
#
कुचिपुड़ी
#5. कथक (उत्तर प्रदेश)
- अन्य नाम: नटवरी
- राधा-कृष्ण की कथाओं पर आधारित
विशेषताएँ
- घुंघरू और चक्कर
- पढंत शैली
घराने
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लखनऊ
-
जयपुर
-
बनारस
-
रायगढ़
-
पुनर्जीवन: लेडी लीला सोखे
-
मुगल प्रभाव स्पष्ट
कथक
#6. कथकली (केरल)
- शुरुआत: केलीकोटटु (ढोल)
- आकाश तत्व का प्रतीक
विशेषताएँ
- भाषा: मणिप्रवलम
- गीत: अट्टकथा
श्रृंगार (वेशम्)
-
पाचा (हरा)
-
काठी
-
थड़ी
-
कारी (काला)
-
मिनुक्कू (पीला)
-
सफेद दाढ़ी: उच्च चेतना
कथकली
#7. मोहिनीअट्टम (केरल)
- अर्थ: सुंदर स्त्री का नृत्य
- एकल महिला द्वारा किया जाता है
विशेषताएँ
- कसाबु साड़ी
- ग्रंथ: व्यवहारमाला
- विष्णु के स्त्री रूप पर आधारित
मोहिनीअट्टम
#8. सत्रिया (असम)
- संस्थापक: श्रीमंत शंकर देव
- 2000 में शास्त्रीय मान्यता
विशेषताएँ
- वैष्णव मठों (सत्र) में विकसित
- अंकियानाट प्रदर्शन
प्रकार
-
भांगी (पुरुष)
-
सीमंगी (महिला)
-
माटी अखोरा: मिट्टी पर अभ्यास
सत्रिया
सारांश
- कुल शास्त्रीय नृत्य: 8 (या 9)
- मुख्य आधार: नाट्य शास्त्र
- धार्मिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता का प्रतिनिधित्व